यह अर्द्ध सम मात्रिक छंद है
इसके चार चरण होते हैं । विषम चरणों में 13-13 तथा सम चरणों में 11-11 मात्राएँ होती हैं। अंत में गुरु लघु आते हैं
उदाहरण:-
1. बड़ा भया तो क्या भया ,जैसे पेड़ खजूर
पंथी को छाया नहीं , फल लागे अति दूर
2. छाया माया एक सी ,बिरला जाने कोय
भगता के पीछे फिरे , सन्मुख भागे सोय
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें