वसन्ततिलका:-( त भ ज ज अंत गुरु गुरु कुल 14 वर्ण)
लक्षण-
1.वसन्त तिलका समवर्ण वृत छन्द है।
2. इसके प्रत्येक चरण में तगण भगण जगण जगण तथा अन्त में दो गुरु वर्ण होते हैं।
3.प्रत्येक चरण में 14 वर्ण होते हैं।
उदाहरण--
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(अ) थे दीखते परम वृद्ध नितान्त रोगी
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वधू गृह में दिखाती या थी नवागत
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कोई न और इनको तज के कहीं था
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सूने सभी सदन गोकुल के हुए थे।
(ब) बातें बड़ी सरस थे कहते बिहारी
छोटे बड़े सकल का हित चाहते थे
अत्यन्त प्यार संग थे मिलते सबों से
वे थे सहायक बड़े दुःख के दिनों के
(स) भू में रमी शरद की कमनीयता थी
नीला अनन्त नभ निर्मल हो गया था
थी छा गई ककुभ में अमिता सितामा
उत्फुल्ल सी प्रकृति थी प्रतिभास होती
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