हिंदी शब्द कोष में :-
अनु - वर्णनीय रस के अनुकूल
प्र - प्रकर्ष या निकटता
आस - बार बार रखा जाना
परिभाषा :- वर्णनीय रस की अनुकूलता के अनुसार वर्णों का बार बार और पास पास प्रयोग होना , अनुप्रास अलंकार कहलाता है।
उदाहरण :-
1.नीरज नयन नेह जल बाढ़ै
2. भरत भारती मंजु मराली
3. मिटे दोष दुःख दारिद दावा
अनुप्रास अलंकार के पांच भेद
१. छेकानुप्रास :-
जहाँ पर एक ही चरण में दो या दो से अधिक आवृति कुछ अंतर पर हो वहाँ छेकानुप्रास अलंकार होता है
उदाहरण --
1. कानन कठिन भयंकर भारी
घोर घाम हिम वारि बयारी। (क , घ वर्ण )
2. अति आनंद मगन महतारी (अ , म वर्ण )
२. वृत्यनुप्रास अलंकार
जहाँ एक या एक से अधिक वर्ण की क्रमवार आवृति हो तो वहाँ वृत्यनुप्रास अलंकार होता है।
३. श्रुत्यनुप्रास अलंकार
जब एक ही स्थान से उच्चरित होने वाले बहुत से वर्णों का प्रयोग किया जाए तो वहाँ पर श्रुत्यनुप्रास अलंकार होता है।
उदाहरण -
1.तुलसीदास सीदत निस दिन देखत तुम्हारि निठुराई (दन्त्य वर्ण)
४. अन्त्यानुप्रास अलंकार
जहाँ किसी पंक्ति में अन्त में एक जैसे स्वर या व्यंजन आते हो तो वहाँ पर अंत्यानुप्रास अलंकार होता है ( तुकांत कविता के अंतिम वर्ण)
उदाहरण --
1. धीरज धरम मित्र अरु नारी
आपति काल परखिय चारी
५. लाटानुप्रास अलंकार
जब किसी वाक्य या वाक्यांश की दो या दो से अधिक बार आवृति हो परन्तु अन्वय प्रत्येक बार भिन्न हो( शब्दों का क्रम) वहाँ लाटानुप्रास अलंकार होता है।
उदाहरण --
1. पराधीन जो जन ,नहीं सरग नरक ता हेतु
पराधीन जो जन नहीं, सरग नरक ता हेतु
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