जहाँ पर अमूर्त भावों का मूर्ती करण कर और जड़ पदार्थों का चेतनवत् वर्णन किया जाता है वहाँ पर मानवीकरण अलंकार होता है। मानवीकरण अलंकार का प्रयोग जड़ का चैतन्यीकरण , अमूर्त भावनाओं का मूर्तिकरण , चेतन का मानवीकरण के रूप में होता है।
उदाहरण : -
1. चुपचाप खड़ी थी वृक्ष पांत।
सुनती जैसी कुछ निजी बात।।
2. शरद आया पुलों को पार करता हुआ ।
3. उधो मन नाही दस बीस ।
एक हुतो सो गयो स्याम संग , को अराधे ईस ।
4. नेत्र निमीलन करती मानो,
प्रकृति प्रबुद्ध लगने लगी ।
5.
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