जब सादृश्यता के कारण उपमेय में उपमान का भ्रम हो जाए अर्थात् जहाँ पर भूलवश उपमेय को उपमान समझ लिया जाए वहाँ भ्रान्तिमान अलंकार होता है।
उदाहरण:-
1.ओस बिन्दु चुग रही हंसिनी मोती उनको जान।
2. पाँय महावर देन को , नाइन बैठी आय .
फिर फिर जानि महावरी , एड़ी मीड़त जाय।
3. कपि करि हृदय विचार , दीन मुद्रीका डारि तब ।
जनु असोक अंगार , दीन हरषि उठि कर गहेउ।।
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