सन्देह अलंकार

परिभाषा :- 
 जब उपमेय में उपमान की अंत तक शंका बनी रहे तो वहाँ संदेह अलंकार होता है अर्थात्  जहाँ पर रूप , रंग  और गुण की समानता के कारण किसी वस्तु को देखकर यह निश्चिय न हो पाए की यह वही वस्तु है

उदाहरण :- 
1.  सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है।
 सारी ही की नारी है कि नारी ही की सारी है।।।

2. ये हैं सरस ओस की बूंदें या है मंगल मोती ।

3. हरि मुख यह आली । किधौं उग्यो मयंक

4.  कि तुम तीन देव में कोऊ । नर नारायण की तुम दोऊ।।

5.  केशों से मोती झरते हैं या मेघों से पानी

6. निद्रा के उस अलसित वन में वह क्या भावी की छाया 
    दृग पलकों में विचर रही , या वन्य देवियों की माया

पहचान ---
  संदेह अलंकार में -कि, किधौं ,या ,अथवा  जैसे वाचक शब्दों का प्रयोग होता है

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें