प्रतीप का आशय - उलटा या विपरीत
जहाँ पर प्रसिद्ध उपमान को उपमेय अथवा उपमेय को उपमान सिद्ध करके उपमेय की उत्कृष्टता वर्णित की जाए वहाँ प्रतीप अलंकार होता है
उदाहरण--
1.सीय बदन सम हिमकर नाहीं
2.काहे करत गुमान मुख, मुख सम मंजु मयंक!
3. सखि ! मयंक तव मुख सम - सुन्दर
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