जब कारण के रहने पर भी कार्य का न होना वर्णित किया जाये तो वहाँ विशेषोक्ति अलंकार होता है।
(यह विभावना अलंकार के विपरीत होता है)
उदाहरण --
1.नेह न नैननि को कछु, उपजी बडी बलाय।
नीर भरे नित प्रति रहे, तऊ न प्यास बुझाय।।
2.दौलय इन्द्र समान बढ़ी ,पै खुमान को नेक गुमान न आयो।
3. सरस्वती के भण्डार की, बड़ी अपूरब बात ।
ज्यों खरचे त्यों - त्यों बढ़े, बिन खरचै घटिजात।।
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