जहाँ कारण कहीं और हो और कार्य कहीं अन्यत्र सम्पन्न होता है वहाँ असंगति अलंकार होता है।
( असंगति अलंकार में एक ही समय में कारण एक स्थान पर तथा कार्य अन्यत्र स्थान पर घटित होना वर्णित किया जाए)
उदाहरण --
1. तीर हिय मेरे पै पीर रघुवीरे।
( यहाँ पर लक्ष्मण जी कह रहे हैं कि तीर तो मेरे हृदय में लगा है परन्तु उसकी पीड़ा प्रभू राम के हृदय में हो रही है।)
2. दृग उरझत टूटत कुटुम, जुरत चतुर संग प्रीति ।
परति गाँठि दुरजन हृदै , दई दई यह नई रीति।।
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