उपमेय के समान अन्य कोई उपमान न मिलने पर स्वयं उपमेय की तुलना उपमेय से ही कर दी जाए अर्थात् उपमेय को ही उपमान बना दिया जाए तो वहाँ पर अनन्वय अलंकार होता है।
उदाहरण :-
1.जदपि दीन जन आरत है।
तदपि भारत के सम भारत है।।
2. सुंदर नंद किशोर से , सुन्दर नन्द किशोर
3. हरि को मुख सखि! हरि - मुख जैसो
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